कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ‘कश्मीर मांगे आजादी’ जैसे अलगाववादी नारों और गतिविधियों को लेकर सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक विरोध और राजनीतिक असहमति की पूरी आजादी है, लेकिन देश की अखंडता और सुरक्षा को चुनौती देने वाले नारों को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। एक स्थानीय समाचार चैनल से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि ऐसे नारे लगाने वालों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि लोकतंत्र में ‘इंकलाब जिंदाबाद’ जैसे राजनीतिक नारे लगाने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार सभी को है। लोग सरकार, भाजपा या उसकी छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की नीतियों के खिलाफ अपनी असहमति जाहिर कर सकते हैं। लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में देश को तोड़ने वाले नारों की अनुमति नहीं दी जा सकती।
अलगाववादी नारों पर होगी कानूनी कार्रवाई
शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में ‘कश्मीर मांगे आजादी’ या इस तरह के किसी भी अलगाववादी नारे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे नारे लगाने वाले लोगों को तत्काल गिरफ्तार किया जाएगा और उनके खिलाफ कानून के तहत मामला दर्ज किया जाएगा।
फिलिस्तीनी झंडों को लेकर भी उठाए सवाल
राज्य में हाल ही में निकले एक धार्मिक जुलूस के दौरान कथित तौर पर फिलिस्तीनी झंडे दिखाई देने का मुद्दा उठाते हुए शुभेंदु अधिकारी ने इस पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस मामले में पहले ही गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और भविष्य में भी ऐसे प्रतीकों के प्रदर्शन पर रोक रहेगी।
उन्होंने कहा कि धार्मिक झंडे रखने में कोई समस्या नहीं है और तिरंगा लेकर निकलने वालों का स्वागत किया जाएगा, लेकिन जुलूसों में फिलिस्तीनी झंडे दिखाने का औचित्य क्या है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस तरह के प्रतीकों के जरिए आखिर किसे उकसाने की कोशिश की जा रही है।
माओवादी विचारधारा को लेकर भी निशाना
शुभेंदु अधिकारी ने विश्वविद्यालय परिसरों की दीवारों पर मारे गए माओवादी नेता किशनजी के समर्थन में लिखे नारों और ‘लाल सलाम’ की संस्कृति पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बंगाल की ऐतिहासिक राष्ट्रवादी पहचान को उग्रवादी या माओवादी विचारधारा से प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।
अरबिंदो से नेताजी तक बंगाल की विरासत का जिक्र
बंगाल के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान का उल्लेख करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने अरबिंदो, सुरेंद्रनाथ बनर्जी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसी महान हस्तियों का नाम लिया। उन्होंने कहा कि बंगाल हमेशा भारत के राष्ट्रीय पुनर्जागरण और देशभक्ति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।
उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति और शासन के दो प्रमुख आधार ‘राष्ट्र प्रथम’ और भाजपा के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी तथा पंडित दीनदयाल उपाध्याय की वैचारिक विरासत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार रचनात्मक आलोचना का स्वागत करती है और जवाबदेही से पीछे नहीं हटती, लेकिन राज्य को डराने या दबाव में लेने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
